राजस्थान में बजरी किल्लत होगी ‘खत्म’, सरकार ने लागू की M-Sand नीति | Daily Current Affairs 2021
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राजस्थान में बजरी किल्लत होगी ‘खत्म’, सरकार ने लागू की M-Sand नीति

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प्रमोद जैन भाया ने कहा कि बजरी की कमी को दूर करने के लिए राजस्थान सरकार ने एम सेंड नीति बनाई है, जिससे लोगों को राहत मिल सके.

जयपुर: राजस्थान में अब लोगों को बजरी की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा. बजरी के विकल्प के रूप में एम सेंड मिलने लगेगी. मंत्री परिषद के अनुमोदन के साथ ही प्रदेश में नई ‘एम सेंड’ नीति लागू हो गई है. खान मंत्री प्रमोद जैन भाया ने कहा कि बजरी की कमी को दूर करने के लिए राजस्थान सरकार ने एम सेंड नीति बनाई है, जिससे लोगों को राहत मिल सके.

दरअसल, प्रदेश में करीब तीन साल से बजरी के खनन-परिवहन पर रोक लगी हुई है. बजरी की किल्लत के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. लोगों को लीगल रूप से बजरी नहीं मिल रही, वहीं, अवैध रूप से बजरी माफिया पनप रहे हैं. बजरी माफिया के कारण कई बार आपराधिक घटनांए भी हो चुकी हैं.

इधर, एम सेंड नीति आने के बाद प्रदेश में सालाना 20 मिलियन एम सेंड का संभावित उत्पादन होगा. खानमंत्री भाया ने कहा कि पांच हजार लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार तथा लाखों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा. राजस्थान में 200 नई एम सेंड इकाइयों की स्थापना संभावित है.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) की अध्यक्षता में 7 दिसंबर को मंत्रिपरिषद की बैठक में नई एम सेंड नीति का अनुमोदन किया गया.  बजरी खनन पर रोक के चलते अवैद्य खनन, परिवहन व भंडारण से आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

अब बजरी का विकल्प उपलब्ध होने से बजरी के अवैद्य खनन, परिवहन और भंडारण पर प्रभावी रोक लगेगी. प्रदेश में निर्माण क्षेत्र को भी नए पंख लगेंगे और निर्माण कार्यों को नई गति मिलेगी. इसके साथ ही राज्य सरकार को अतिरिक्त राजस्व भी मिलेगा. मंत्री प्रमोद जैन भाया ने एम सेंड को बजरी का सस्ता और मजबूत विकल्प बताया है. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर भी उपलब्ध होंगे. 

Source: Zee News

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