Daily Current Affairs 2020 दिल्ली / सेना प्रमुख बोले- सियाचिन ग्लेशियर को आम लोगों के लिए खोला जाएगा, इस पहल से राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा मिलेगा | Daily Current Affairs 2020

दिल्ली / सेना प्रमुख बोले- सियाचिन ग्लेशियर को आम लोगों के लिए खोला जाएगा, इस पहल से राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा मिलेगा

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  • सेना प्रमुख जनरल रावत ने कहा- लोगों को सेना की चुनौतियों से रूबरू होने का मौका मिलेगा
  • माइनस 50 डिग्री तापमान में यहां जवान सालभर तैनात रहते हैं

नई दिल्ली . ‘हमारा सबसे सगा दोस्त और कट्टर दुश्मन ही हमसे मिलने यहां आता है’- सियाचिन ग्लेशियर के इलाके में चट्‌टानों पर यह बड़ा बड़ा नारा जहां-तहां पत्थरों से उकेरा हुआ दिखता है। अब देश के आम लोग भी इन जगहों पर जाकर गर्व महसूस कर सकेंगे। सेना प्रमुख जनरल रावत ने मंगलवार को कहा है कि नागरिकों को सीमा क्षेत्र में तैनात जवानों की चुनौतियों से रूबरू कराने के लिए भारतीय सेना अपने ऑपरेशनल एरिया पर्यटन के लिए खोलने जा रही है।

दुनिया सबसे ऊंची रणभूमि सियाचिन के दुर्गम क्रिवास, अग्रिम चौकियों और तमाम उन इलाकों को खोला जाएगा, जिनके बारे लोग अभी अखबारों में ही पढ़ पाते हैं। करगिल की उन चोटियों को भी नागरिक देख सकेंगे जिन्हें कभी पाक सेना के इशारे पर आतंकियों ने कब्जे में कर लिया था। इसके अलावा लोगों को सिक्किम से लेकर अरुणाचल और नगालैंड तक के सैन्य इलाकों में जाने की इजाजत मिलेगी। चीन के साथ विवाद के कारण इन प्रदेशों के अनेक सीमांत इलाकों में जाने की अनुमति नहीं है। इनमें अरुणाचल की तवांग घाटी और नगालैंड के वर्जित इलाके भी शामिल होंगे। 


सेना ने लोगों को सियाचिन ले जाने की शुरुआत 2007 में की थी। इसके तहत साल में एक बार 30-35 लोगों के एक समूह को ग्लेशियर की सैर करवाई जाती रही है। लेह में हफ्तेभर ट्रेनिंग के बाद उन्हें दुर्गम चोटियों तक ले जाते हैं। सेना अभी तय कर रही है कि किन इलाकों के लिए अनुमति होगी। सैन्य इलाकों में लोगों के जाने के लिए परमिट व्यवस्था पर भी विचार हो रहा है। 

सैनिकों ने कमर पर रस्सी बांधकर सियाचिन से 130 टन कचरा साफ किया : बेस कैंप से भारत की सबसे दूर स्थित चौकी इंद्रा कॉल है। सैनिकों को वहां पैदल जाने में 20 से 22 दिन लगते हंै। सैनिक एक के पीछे लाइन में चलते हैं और एक रस्सी सबकी कमर में बंधी होती है, ऐसा इसलिए करते हंै, क्योंकि बर्फ कभी भी धंस सकती है, अगर कोई सैनिक गिरने लगे तो बाकी उसे बचा सकें। सैनिकाें ने यहां से सालभर में 130 टन कचरा साफ किया है।

Source : Dainik Bhaskar

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